बदन पर खाकी वर्दी, कार्यप्रणाली भी हार्ड,

बदन पर खाकी वर्दी, कार्यप्रणाली भी हार्ड,

बदन पर खाकी वर्दी, कार्यप्रणाली भी हार्ड,

न पर खाकी वर्दी, कार्यप्रणाली भी हार्ड, कंधों पर सितारे भी एक जैसे। लेकिन सुविधाएं और वेतन दिहाड़ीदार की माफिक। यही हालत है प्रदेश भर के करीब 14 हजार होमगार्ड जवानों व वॉलंटियर्स की। ये लोग आज भी पुलिस के समान सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।

कंधों पर सिर्फ सितारे, सुविधाएं नहीं
प्रदेश में करीब चौदह हजार होमगार्ड के जवान पुलिस, थर्मल, बिजली, एफसीआई, रेलवे, माइनिंग, कांफेड इत्यादि विभागों में अस्थायी सेवाएं दे रहे हैं। विभिन्न राज्यों में चुनाव के दौरान इन्हें दूसरे प्रांतों में भी भेजा जाता है। सूबे के हर जिले में होमगार्ड्स की औसतन पांच कंपनियां तैनात हैं। इनमें होमगार्ड का जिला कमांडेंट पुलिस के डीएसपी रैंक, कंपनी कमांडर पुलिस के इंस्पेक्टर रैंक, प्लाटून कमांडर पुलिस के सब इंस्पेक्टर रैंक, हवलदार इंस्ट्रेक्टर पुलिस के हेड कांस्टेबल और हवलदार क्लर्क पुलिस के हवलदार रैंक के बराबर होते हैं। लेकिन विडंबना यह कि होमगार्ड के तमाम रैंक सिर्फ ऑनरेरी हैं।

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