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Homoeopathic Medical College Sector 6 No Infrastructure, Nor The Teacher And Laboratory

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Homoeopathic Medical College

कॉलेज में न बैड रखने का स्पेस, न इन्फ्रास्ट्रक्चर, न पूरे टीचर, न लैबोरेटरी

होम्योपैथिक मेडिकल कालेज, सेक्टर-6 के लिए नियम कानूनों का कोई मतलब नहीं। रेगुलेटरी बॉडी या मिनिस्ट्री आफ आयुष जिसके निर्देशों का पालन करना कालेज के लिए निहायत जरूरी है, उसे भी अपने गोरखधंधों से गज्जा देने की लगातार कोशिश करता रहा है। कालेज ने प्रशासन के पास 18 एम.डी. की सीटों के लिए आवेदन किया था। इसके लिए न तो कालेज में इनफ्रास्ट्रक्चर पूरा है और न ही स्टाफ। बावजूद इसके प्रशासन कालेज को एन.ओ.सी. देने के लिए तैयार है। यह समझ से परे हैं कि प्रशासन कालेज मैनेजमेंट के सामने हमेशा ही पलके बिछाए क्यों खड़ा है?

100 सीटों पर एडमिशन की मंजूरी मांगी थी

कालेज ने पहले तो अपने यहां 100 सीटों पर एडमिशन की मंजूरी मांगी थी। जब से कालेज शुरू हुआ, यहां 50 सीटों की ही मंजूरी थी। पहले सेंट्रल कौंसिल ऑफ होम्योपैथी और दोबारा मिनिस्ट्री आफ आयुष से कालेज की अतिरिक्त सीटों की मांग को रिजैक्ट कर दिया क्योंकि कागजातों की जांच में 2017 में सी.सी.एच. ने पाया कि यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्टाफ ही पूरा नहीं है। मिनिस्ट्री ऑफ आयुष ने इस बाबत कालेज प्रशासन को 23 अप्रैल 2018 में सूचना भी दे दी। कालेज प्रशासन ने पी.यू. से प्रोवीजन एफीलिएशन हासिल कर दोबारा सीटें बढ़ाने का आवेदन मिनिस्ट्री को दिया। आयुष ने 5 मार्च 2019 को दोबारा आवेदन सेम ग्राउंड पर खारिज कर दिया।

डायरैक्टर ने बना दी है कमेटी

कालेज 100 सीटों के आवेदन से तो पीछे हट गया। मगर उसने जी.एम.सी.एच.-32 में तीन सब्जेक्ट्स में एम.डी. सीटों के लिए आवेदन किया। जी.एम.सी.एच.-32 के डायरैक्टर ने इसके लिए कमेटी बना दी। कमेटी ने न तो कालेज में जाकर यहां के इन्फ्रास्ट्रक्चर का कोई फिजिकल वैरीफिकेशन किया और न ही जानने की कोशिश की कि स्टाफ पूरा है या नहीं और एम.डी. सीटों के लिए कालेज को एन.ओ.सी. देने के लिए प्रशासन के पास रिकमेंडेशन भेज दी। यह संस्तुति अभी प्रशासन के पास पड़ी है। अगर एम.डी. शुरू करने की प्रशासन परमिशन देता है तो यहां 18 सीटें होंगी।

प्रस्ताव भेजेंगे आगे

प्रिंसिपल होम सैक्रेटरी अरुण कुमार गुप्ता का कहना है कि हमारे पास अगर कालेज की सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव आएगा, वह तो उसे स्टूडैंट्स के हित में आगे भेजेंगे। आगे का काम रेगुलेटरी बॉडी का है जिसे देखना है कि सीटें तय नियमों के अनुसार बढ़ाई जा सकती हैं या नहीं? उन्होंने कहा कि अभी तक उनके पास यह फाइल नहीं आई है। मामले में होम्योपैथी कालेज के प्रिंसिपल को मैसज भेजकर व फोन कर संपर्क किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। एम.डी. कोर्स के लिए नैब और नैक की भी मान्यता नहीं है।

बैड तक रखने की जगह नहीं

यहां बता दें कि अगर कालेज 100 सीटों के लिए आवेदन करता है तो इसके लिए उसके पास क्लासरूमों में कम से कम 1500 स्कवायर फीट की जगह होनी अनिवार्य है जो कालेज के पास अभी नहीं है। कालेज के पास 700 स्कवायर फीट से ज्यादा जगह नहीं। इसी तरह 100 सीट के लिए अस्पताल में (इंडोर) कम से कम 25 बैड होने चाहिएं। अभी कालेज के पास 50 सीटें हैं और इसके मुताबिक 20 बैड उपलब्ध हैं। पांच बैड कालेज ने खरीदे हैं लेकिन एक बैड में कम से कम साढ़े तीन फीट का डिस्टेंस होना चाहिए। यानि इन पांच नए बैड को रखने के लिए अस्पताल में जगह तक नहीं है। अगर एम.डी. की 18 सीटें कालेज को मिलती हैं तो एक सीट के लिए एक बैड की जरूरत है।

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