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Punjab MP Making Fake Promises

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Fake Promises

उम्मीद थी कि जनता के नुमाइंदे आदर्श पंजाब का सपना साकार करेंगे लेकिन 5 साल में आदर्श गांव का सपना भी पूरा नहीं कर पाए। कम से कम सांसद आदर्श ग्राम योजना के संदर्भ में पंजाब के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों का रिपोर्ट कार्ड ऐसी ही कहानी बयां करता है। ग्रामीण मंत्रालय की परफॉर्मैंस रिव्यू कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया कि सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत पंजाब में जितने विकास कार्य चालू हुए, उनमें से अब तक केवल 31 फीसदी कार्य ही मुकम्मल हो पाए हैं। यह आंकड़ा भी केवल उन सांसदों का है जिन्होंने योजना के तहत गांवों को गोद लिया। वहीं, कई सांसद  ऐसे भी हैं जिन्होंने गांवों को गोद लेने की जहमत तक नहीं उठाई है।

गांवों को गोद लेने वाले कई सांसदों ने महज कागजी खानापूर्ति ही की। अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि आबंटित विकास कार्यों में से केवल 31 फीसदी ही मुकम्मल हो पाए। खास बात यह है कि कई ग्राम पंचायतों का विलेज डिवैल्पमैंट प्लान तक तैयार नहीं किया गया है। योजना के दूसरे चरण में केवल 3 ग्राम पंचायतों के विलेज डिवैल्पमैंट प्लान अपलोड किए गए, वहीं तीसरे चरण में कोई भी प्लान अपलोड नहीं किया गया।

दूसरे चरण में इन सांसदों ने अपनाई आदर्श सांसद ग्राम योजना

लोकसभा
गुरजीत सिंह औजला
हरसिमरत कौर बादल
प्रेम सिंह चंदूमाजरा
धर्मवीर गांधी
शेर सिंह घुबाया
रवनीत सिंह

राज्यसभा

नरेश गुजराल
शमशेर सिंह दूलो

तीसरे चरण में इन सांसदों ने अपनाई योजना

लोकसभा

हरसिमरत कौर बादल

प्रेम सिंह चंदूमाजरा

राज्यसभा

नरेश गुजराल

श्वेत मलिक

पहले फेज के बाद सांसद उदासीन

अक्तूबर, 2014 में योजना के आगाज के समय तय किया गया था कि वर्ष 2019 तक हर सांसद 3 ग्राम पंचायतों को गोद लेकर आदर्श ग्राम बनाएंगे। यह योजना तीन चरणों में पूरी की जानी थी। बेशक पंजाब में पहले चरण दौरान लोकसभा और राज्यसभा के 20 सांसदों ने आदर्श ग्राम का चयन किया लेकिन इसके बाद उनका रवैया उदासीन हो गया। दूसरे चरण में लोकसभा के 13 में से केवल 6 और राज्यसभा के 7 में से केवल 2 ने ग्राम पंचायत को गोद लिया। वहीं, तीसरे चरण में लोकसभा और राज्यसभा के 2-2 सांसदों ने ही योजना में रुचि दिखाई है।

भाजपा सांसदों ने ही दिखाई बेरुखी

योजना को लॉन्च करने वाली भाजपा के ही सांसद पंजाब में योजना के प्रति संजीदा नहीं रहे। दूसरे व तीसरे चरण में भाजपा सांसदों ने खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल के सांसदों का रवैया भी बेरुखी भरा रहा है। दूसरे व तीसरे चरण में कई शिअद सांसदों ने ग्राम पंचायत का चयन तक नहीं किया। इसी कड़ी में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के सांसदों का भी योजना से मोहभंग रहा है।

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