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फिर लटका इंटैलीजैंट पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम का काम

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Chandigarh

शहर में इंटैलीजैंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम को लागू करने के प्रोजैक्ट का काम और लटक गया है, क्योंकि वर्ल्ड बैंक ने दोनों कंपनियों द्वारा एक दूसरे पर लगाए गए आरोपों की दोबारा से जांच से करने के निर्देश दिए हैं। 6 महीने पहले ही लटक चुका प्रोजैक्ट अब दो महीने के लिए और लटक गया है।

इस साल जून में प्रशासन ने इस प्रोजैक्ट के लिए फाइनैंशियल बिड खोलनी थी लेकिन जिन दो कंपनियों ने अप्लाई किया था, उन्होंने सर्टीफिकेट पूरे न होने को लेकर एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दे थी। विवाद होने के चलते ही प्रशासन फाइनैंशियल बिड नहीं खोल पाया था, जिसकी रिपोर्ट ट्रांसपोर्ट डिपार्टमैंट ने वल्र्ड बैंक को भेज दी थी।

इस संबंध में ट्रांसपोर्ट डिपार्टमैंट के एक अधिकारी ने बताया कि वल्र्ड बैंक ने उन्हें फाइनैंशियल बिड खोलने से पहले कंपनियों की शिकायतों की दोबारा से जांच करने के लिए बोला है। सलाहकार से इस संबंध में परमिशन ले ली गई है।

इस प्रक्रिया में अब दो महीने और लग जाएंगे। गौरतलब है कि प्रशासन ने वल्र्ड बैंक के अधिकारियों के साथ कई मीटिंग की थी, जिसके बाद ही उन्होंने इस प्रोजैक्ट को हरी झंडी दी थी। जिस कंपनी को प्रशासन काम अलॉट करेगा, वह 5 साल के लिए पूरे प्रोजैक्ट को मैंटेन भी करेगी।

वर्ष 2014 में चंडीगढ़ उन चार शहरों में चुना गया था, जिनका ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत किया जाना था। इनमें जयपुर, भोपाल के अलावा मुंबई के पास मीरा-भायंदर को भी चुना गया था। जून वर्ष 2016 में वर्ल्ड बैंक और चंडीगढ़ प्रशासन के बीच एम.ओ.यू. भी साइन किया गया था।

जुलाई 2017 में प्रशासन ने कंसल्टैंट हायर किया था, जिसने प्रोजैक्ट की डिटेल प्रोजैक्ट रिपोर्ट बनाई थी। प्रोजैक्ट की कुल लागत 25 करोड़ रुपए हैं, जिसमें से 13 करोड़ रुपये की फंडिंग वल्र्ड बैंक ने करनी है। कंपनी फाइनल न होने के कारण मार्च 2019 तक काम पूरा करने का प्रशासन का लक्ष्य अब पूरा होने वाला नहीं है।

बसों में प्रदान करनी हैं ये सुविधाएं

इंटरनल बोर्ड में रूट और अगला डेस्टिनेशन देख सकेंगे। जिस जगह उतरना है, उसकी जानकारी भी बोर्ड से मिलेगी। एमरजैंसी अलार्म की सुविधा होगी। बसों की कनैक्टिविटी बस स्टॉप से होगी, जिससे रियल टाइम लोगों को बस को लेकर मिल सकेगा कि कितनी देर में बस स्टॉप पर पहुंचेगी।

ये सुविधाएं भी होंगी

-सभी बस स्टॉप पर इलैक्ट्रोनिक डिस्पले लगाए जाने हैं, ताकि बसों के आने के सही वक्त का पता लगता रहे।
-लोगों तक ऐप्प के जरिए उनके फोन पर भी बसों की सही टाइमिंग को पहुंचाना है।
-प्राइमरी कंट्रोल स्टेशन के जरिए सी.टी.यू. की सभी बसों पर जी.पी.एस. से ट्रैक किया जाना है।
-बस डिपो को भी प्राइमरी कंट्रोल स्टेशन से लिंक किया जाना है।
-बस ड्राइवरों को एस.एम.एस. की सुविधा दी जाएगी, जिससे कि वह अपने निकलते वक्त की जानकारी दे सकेंगे, जिसे कि सी.टी.यू. के सैंट्रल सिस्टम द्वारा मॉनिटर किया जाना है।

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