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महाराष्ट्र के इस किले का पानी मिनरल वॉटर से कम नहीं, किले के साथ इस प्राचीन तकनीक को देखने आते है पर्यटक

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Shivneri Fort

हमारे देश में लगभग सभी पर्यटन स्थलों के साथ कोई न कोई कहानी जुड़ी हुई है. सबसे ज्यादा प्राचीन किलो और मंदिरों के बारे में कई तरह की बातें सुनने को मिलती है. महाराष्ट्र में एक ऐसा ही किला है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां किले में मौजूद कुंड का पानी किसी मिनरल वॉटर से कम नहीं है.

गर्मियों में भी नहीं सूखता पानी

शिवनेरी किले में ही 1627 में छत्रपति शिवाजी का जन्म हुआ था. शिवनेरी फोर्ट में पानी की व्यवस्था के लिए दो टैंक बनाए गए थे, जिन्हें गंगा और यमुना तालाब के नाम से जाना जाता है. दरअसल इन दोनों तालाबों को बनाने के लिए एक खास विधि का इस्तेमाल किया गया था. अंदर का मुख्य तालाब, चट्टानों को खोदकर बनाया गया था, जिसके अंदर बारिश में पानी भर जाता है.

इसके बाद एक टैंक बाहर की तरफ बनाया गया था. सबसे दिलचस्प बात ये है कि जब गर्मी पड़ती है, तो बाहर के टैंक का पानी भाप बन जाता है और वहीं भाप अंदर बने टैंक में फिर से इकट्ठा होकर पानी बन जाती है. यही कारण है कि अंदर बने टैंक का पानी न ही सूखता है और न ही खराब होता है.इसी वजह से अंदर बने टैंक में गर्मियों में भी पानी नहीं सूखता है और इसका पानी मिनरल वॉटर की तरह ठंडा रहता है. इस किले में ही साल 1627 में छत्रपति शिवाजी का जन्म हुआ था. यह किला शिवाजी के बचपन का गवाह है, यहां आज भी शिवाजी का पालना रखा हुआ है. शिवाजी ने यहीं पर युद्ध कला सीखी थी.

कैसे पहुंचे

आप पुणे रेलवे स्टेशन पहुंचकर शिवनेरी फोर्ट टैक्सी या बस के माध्यम से पहुंच सकते हैं. वहीं फ्लाइट से जाने के लिए आपको पुणे एयरपोर्ट पहुंचना होगा.

घूमने के लिए बेस्ट टाइम

आप यहां साल के किसी भी महीने में पहुंच सकते हैं.

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