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लुधियाना के डीएमसी को एक मेडिकल टीम के गठन का आदेश

लुधियाना के डीएमसी को एक मेडिकल टीम के गठन का आदेश

डेरा नूर महल दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज की समाधि को लेकर आखिरकार पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों से स्थिति स्पष्ट हो गई है। हाईकोर्ट ने आशुतोष महाराज के शरीर का अंतिम संस्कार करने के सिंगल बेंच के आदेशों को खारिज कर दिया है और इसके साथ ही अब आशुतोष महाराज की समाधि बरकरार रहेगी। साथ ही कोर्ट ने आशुतोष महाराज का बेटा होने का दावा करने वाले दिलीप कुमार झा की डीएनए टेस्ट करवाने संबंधी याचिका पर निचली अदालत में जाने की सलाह दी।
बुधवार को जस्टिस महेश ग्रोवर एवं जस्टिस शेखर धवन की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि वर्तमान में शरीर को संरक्षित करने या निपटारे को लेकर कोई कानून न होने के चलते संस्थान द्वारा महाराज के शरीर को संरक्षित रखा जा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान और विज्ञान के अनुसार संस्थान महाराज के शरीर को तब तक संरक्षित रखा जा सकता है जब तक शरीर सही सलामत है।

हाईकोर्ट ने लुधियाना के डीएमसी को एक मेडिकल टीम के गठन का आदेश दिया है, जिसकी निगरानी में महाराज के शरीर को संरक्षित रखा जाएगा। इस टीम में जालंधर के चीफ मेडिकल ऑफिसर की निगरानी में काम करेगी और निर्धारित समय अंतराल पर आशुतोष महाराज के शरीर का निरीक्षण करती रहेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह सही स्थिति में रहे।
मृत या समाधि तय करना सरकार का काम नहीं

हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस टीम का खर्च संस्थान को उठाना होगा। अगर संस्थान खर्च नहीं देता है तो टीम के पास यह छूट होगी की वह जालंधर के सीजेएम के समक्ष इस मामले में अर्जी दायर कर संस्थान की संपत्ति से इसकी रिकवरी करवा सके। हाईकोर्ट ने इसके लिए संस्थान को 50 लाख का एक कॉर्पस फंड बना इसकी एफडी करवाए जाने के निर्देश भी दिए हैं ताकि मेडिकल टीम का खर्च इस फंड से जुटाया जा सके।

दिलीप झा के डीएनए टेस्ट संबंधी याचिका पर टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अगर वह डीएनए टेस्ट कराना चाहते हैं तो सिविल कोर्ट में याचिका दाखिल करें। अगर कोर्ट डीएनए टेस्ट का आदेश देती है तो आशुतोष महाराज के शरीर से डीएनए टेस्ट कराने में डेरा के लोग कोई बाधा नहीं डालेंगे।

मृत या समाधि तय करना सरकार का काम नहीं
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की दलील भी स्वीकार की है, जिसके तहत पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा ने कहा था कि महाराज समाधि में हैं या मृत, यह तय करना सरकार का काम नहीं है। इस विषय पर सरकार बिलकुल तटस्थ है। यह आस्था और विश्वास का विषय है और सरकार का काम सभी की धार्मिक भावनाओं की सुरक्षा करना है। एडवोकेट जनरल ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा था कि सिंगल पीठ ने महाराज के शरीर के अंतिम संस्कार के लिए एक कमेटी गठित करने का फैसला सुनाया था, जबकि ऐसी कोई मांग हाईकोर्ट से नहीं की गई थी। सरकार का काम सिर्फ कानून व्यवस्था बनाये रखना है।
यह थे सिंगल बेंच के आदेश

आशुतोष महाराज
यह थे सिंगल बेंच के आदेश
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने आशुतोष महाराज का 15 दिन के भीतर अंतिम संस्कार करने का आदेश जारी किया था। जस्टिस एमएमएस बेदी ने 129 पेज के आदेश में पंजाब के मुख्य सचिव, डीजीपी, गृह सचिव, स्थानीय निकाय विभाग के प्रमुख सचिव की एक कमेटी के आधीन जालंधर के डीसी, एसडीएम, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, निगम आयुक्त की एक कमेटी बनाकर उसे अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी सौंपने के निर्देश दिए थे।

डीजीपी को इस मामले में राज्य की कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित प्रबंध करने के आदेश दिए गए थे। हाई कोर्ट ने महाराज के अनुयायियों को महाराज के शरीर के अंतिम दर्शन के लिए संस्थान को उचित प्रबंध करने का आदेश भी दिया था। जस्टिस बेदी ने अपने आदेशों में कहा था कि पंजाब सरकार पहले ही महाराज को मृत घोषित कर चुकी है।

संस्थान का दावा कि महाराज गहन समाधि में हैं और वे जब चाहेंगे समाधि से बाहर आ जाएंगे, टिकता नहीं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि अगर 15 दिन के भीतर इस शरीर का अंतिम संस्कार नही किया गया तो यह हाईकोर्ट की अवमानना होगी। आश्रम या कोई अन्य इस मामले में रुकावट पैदा करेगा तो उस के खिलाफ अवमानना का मामला बन सकता हैं। सिंगल बेंच ने हाईकोर्ट ने अपने फैसले में विधायिका से आग्रह किया कि वो इस बाबत कोई नियम बनाए ताकि इस तरह के मामले और न हों और दुविधा की स्थिति पैदा न हो

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