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CBSE Exam, Students Facing Problems Due To Board Rule About Entry In Exam Center

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बोर्ड परीक्षा के लिए निर्धारित सीबीएसई के कड़े नियम स्टूडेंट्स के भविष्य पर ही भारी पड़ने लगे हैं। परीक्षा के लिए निर्धारित समय से एक मिनट की भी देरी से सेंटर पर पहुंचने वाले परीक्षार्थियों को एंट्री नहीं दी जा रही है। ऐेसे में विद्यार्थियों की पूरी साल की मेहनत पर चंद मिनटों में पानी फिर जा रहा है। स्थिति यह है कि परीक्षा के लिए एंट्री नहीं मिलने पर छात्र और उनके अभिभावक शिक्षकों के सामने गिड़गिड़ाते नजर आ रहे हैं।

मंगलवार को सेक्टर-18 स्थित गवर्नमेंट गर्ल्स मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल का गेट ठीक 10 बजे बंद कर दिया गया। अभी गेट को बंद कर कुंडी लगाई ही थी कि दो परीक्षार्थी (12वीं फिजिक्स और 10वीं पंजाबी) भागते हुए स्कूल गेट पर पहुंचे और गार्ड से गेट खोलने की अपील की लेकिन गेट नहीं खुला। वह बार-बार कहते रहे कि काफी दूर से परीक्षा देने आए हैं।

2 मिनट तो कोई भी लेट हो जाता है प्लीज…गेट खोल दो लेकिन गेट के दूसरी तरफ मौजूद टीचर्स खड़े होकर सब देखते रहे लेकिन उन्हें एंट्री नहीं दी गई। अगले कुछ ही मिनटों में 7 बच्चे और आ गए। इनमें से 10वीं की एक छात्रा को एंट्री नहीं मिली तो वह फूट-फूट कर रोने लगी। पैरेंट्स से यह देखा नहीं गया और उन्होंने 100 नंबर पर कॉल कर दी। कुछ ही मिनटों में पुलिस भी मौके पर आ गई।

पैरेंट्स ने पुलिस से मामले की शिकायत की और कहा कि 2-3 मिनट तो टीचर्स भी लेट हो ही जाते हैं फिर सारे कानून बच्चों के लिए ही क्यों। इसके बाद कांस्टेबल ने प्रिंसिपल से मिलकर बातचीत की लेकिन कोई हल नहीं निकला। आखिर में रोते हुए सभी बच्चे घर चले गए।

‘जीरकपुर में लगा था लंबा जाम, आखिर क्या करते’

दिलीप कुमार बलटाना से अपने बेटे को लेकर परीक्षा दिलवाने पहुंचे थे। 12वीं में पढ़ रहे उनके बेटेे का फिजिक्स का पेपर था। वह सेंटर पर 10.03 बजे पहुंचे। तब तक स्कूल का गेट बंद हो चुका था और बच्चे को एंट्री नहीं मिली। तभी जीरकपुर से दसवीं के दो बच्चों के साथ अभिभावक रूबी चौहान भी पहुंचीं। सभी बच्चे परीक्षा सेंटर में दाखिल होने के लिए गेट खोलने की गुहार लगा रहे थे। गेट नहीं खुलने पर रूबी चौहान ने 100 नंबर पर कॉल कर दी।

चंद मिनटों में पुलिस पहुंच गई। रूबी ने पुलिस को बताया कि वह बच्चों के साथ काफी पहले निकलीं थीं लेकिन जीरकपुर फ्लाईओवर के पास काफी लंबा जाम लगा था, जिसकी वजह से वह लेट हो गईं। अब जाम में फंसा आदमी आखिर क्या कर सकता है। मौके पर पहुंचे कांस्टेबल वीरेंदर ने उनकी शिकायत सुनी और प्रिंसिपल के पास पहुंचे लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। बच्चों को परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया। 9 बच्चे स्कूल के गेट पर खड़े होकर रोते रहे।

गेट फांदने की भी कोशिश

जब पुलिस से शिकायत के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला तो साल बर्बाद होने और भविष्य के अंधकार में जाने के डर से कुछ बच्चों ने स्कूल के गेट को फांदने की कोशिश भी की। हालांकि गार्ड ने उन्हें रोक दिया और वापस भेज दिया। वह गिड़गिड़ाने लगे कि साल खराब हो जाएगा। छात्र कहते रहे कि अभी परीक्षा शुरू नहीं हुई होगी, वो कवर कर लेंगे। लेकिन सुरक्षाकर्मी व टीचर्स ने कहा कि वह कुछ नहीं कर सकते क्योंकि सीबीएसई के सख्त निर्देश हैं।

क्या बोले अभिभावक

मेरा बेटा नान-मेडिकल का स्टूडेंट है। आज उसका फिजिक्स का पेपर था। बलटाना से स्कूल तक पहुंचने के बीच में कई जगह जाम लगा हुआ था। फिर भी हम 10.03 बजे स्कूल के गेट पर पहुंच गए थे, लेकिन बच्चे को एंट्री नहीं दी गई। स्कूल प्रशासन ने यह भी नहीं सोचा कि तीन मिनट की वजह से बच्चे का साल खराब हो जाएगा। बच्चे ने साल भर पढ़ाई की लेकिन चंद मिनटों की वजह से उसे पेपर में नहीं बैठने दिया गया। अभी तो बच्चे बैठ ही रहे होंगे, हमारे भी बच्चे को जाने देते तो उसका साल बच जाता।
– दिलीप सिंह, परिजन

मेरे दोनों बच्चे दसवीं में हैं। आज उनका पंजाबी का पेपर था। हम घर से काफी पहले ही निकले थे लेकिन जीरकपुर में जाम लगे होने की वजह से लेट हो गए। स्कूल पहुंचे तो गेट बंद था। बच्चों को एंट्री दिलाने के लिए गार्ड से काफी रिक्वेस्ट की लेकिन किसी ने नहीं सुनी। बोर्ड और स्कूल की तानाशाही है। दोनों बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। मेरी बेटी बहुत होनहार है लेकिन पेपर नहीं देने की वजह से वह बहुत परेशान हो गई है। उसे सदमा सा लग गया है। अगले पेपर वह कैसे देगी, यह टेंशन है।
– रूबी चौहान, परिजन

सीबीएसई के अपने नियम और कानून हैं। पेपर लीक या कोई अन्य अप्रिय घटना न घटे इसलिए बोर्ड ने इस बार काफी सख्त कदम उठाए हैं। स्टूडेंट्स को उन्हें फॉलो करना ही होगा। अगर 10 बजे के बाद एंट्री पर बैन है तो स्टूडेंट्स को उससे पहले सेंटर पर पहुंचना ही होगा।
– बीएल शर्मा, शिक्षा सचिव

2-4 मिनट के लिए बच्चों का साल बर्बाद करना संवेदनहीनता की हद है। सीबीएसई के नियमों का पालन जरूरी है लेकिन ट्रैफिक जाम, एक्सिडेंट या कोई अप्रिय घटना किसी के भी साथहो सकती है। ऐसी स्थिति में स्टूडेंट्स को कुछ तो रियायत देनी चाहिए।
– नितिन गोयल, प्रेसिडेंट, पैरेंट्स एसोसिएशन

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