सरकार इस स्कीम को लागू करने के लिए अदालत से तीन माह का समय लेगी

सरकार इस स्कीम को लागू करने के लिए अदालत से तीन माह का समय लेगी

सरकार इस स्कीम को लागू करने के लिए अदालत से तीन माह का समय लेगी

सरकार ने बादलों द्वारा नियंत्रित ट्रांसपोर्ट पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। पंजाब कैबिनेट ने बुधवार को नई ट्रांसपोर्ट नीति को मंजूरी दे दी। प्रवक्ता ने बताया कि नई नीति के मुताबिक सरकार बादलों द्वारा नियंत्रित लग्जरी बस सेवाओं में स्टेट ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग का हिस्सा बढ़ाएगी, ताकि इन पर सरकार का नियंत्रण हो सके।
अंतरराज्यीय, प्वाइंट टु प्वाइंट सुपर इंटीगरल कोच सर्विस में स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी ताकि ज्यादा राजस्व वाले रूटों पर माफिया का नियंत्रण खत्म किया जा सके।विजिलेंस और पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स बनाई जाएगी, जोकि दो माह में सड़कों पर दौड़ रही अवैध बसों पर लगाम कसेगी। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशानुसार तैयार की गई ड्राफ्ट ट्रांसपोर्ट स्कीम 2017 पर तीस दिन तक लोगों केसुझाव लिए जाएंगे।

सरकार इस स्कीम को लागू करने के लिए अदालत से तीन माह का समय लेगी, ताकि सड़कों से बड़ी संख्या में बसें हट जाने केकारण लोगों को परेशानी न हो। स्कीम लागू होने के बाद 5432 बसों के रूट एक्सटेंशन, डाइवर्जन, 6700 मिनी बस और 78 लग्जरी कोच के परमिट कैंसिल करके नए सिरे से अलॉट किए जाएंगे। नए नियमों से बसों का टाइम टेबल तय किया जाएगा, एसटीयू व निजी बसों को बस स्टैंड पर रुकने के लिए बराबर का समय दिया जाएगा।

निजी ऑपरेटरों केलिए सिंगल रूट पर मासिक रोस्टर बनाया जाएगा। एक साल में इसके लिए आवश्यक सॉफ्टवेयर तैयार किया जाएगा। परमिट में रजिस्ट्रेशन नंबर होगा, परमिट की कॉपी वाहन में लगानी जरूरी होगी। अगर किसी एक रूट के लिए निर्धारित परमिट से ज्यादा आवेदन आते हैं तो ड्रॉ केजरिए अलॉटमेंट की जाएगी। किसी एक रूट पर कुल परमिट के 25 प्रतिशत से ज्यादा किसी एक कंपनी को नहीं दिए जाएंगे। परमिट पांच साल के लिए मान्य होगा। रिन्युअल के बाद फिर वह पांच साल तक मान्य होगा। बस बदलने या परमिट होल्डर की मौत केअलावा परमिट ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। रूट में बदलाव या बढ़ोतरी नहीं हो सकेगी। ऑपरेटर तीन माह केनोटिस पर परमिट सरेंडर कर सकेगा।

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