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सेना को मिलेगी ‘नाग’ की ताकत, किसी भी समय दुश्मनों के टैंकों को तबाह कर सकती है यह मिसाइल

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रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) की बैठक हुई जिसमें पूंजी अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई.

रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने शुक्रवार (27 अप्रैल) को नौसेना के लिए डीआरडीओ द्वारा डिजायन किए गए नाग मिसाइल प्रणाली और 127 एमएम कैलीबर बंदूक समेत 3,687 करोड़ रुपये अधिक की पूंजी अधिग्रहण प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्क्षयता में डीएसी ने नाग मिसाइल प्रणाली (एनएएमआईएस) के खरीद को मंजूरी दी है, जिसकी लागत 524 करोड़ रुपये है. इसका डिजायन और विकास रक्षा शोध व विकास संगठन (डीआरडीओ) ने किया है और यह भारत की बढ़ती तकनीकी शक्ति का प्रतिबिंब होने के अलावा स्वदेशीकरण को भी बढ़ावा देगा.

आधिकारिक बयान में कहा गया, “नाग मिसाइल तीसरी पीढ़ी का टैंकरोधी गाइडेड मिसाइल है, जिसमें हमले की अचूक क्षमता है और यह दिन हो या रात दुश्मन के सभी प्रकार के टैंक को नष्ट कर सकती है. इससे सेना की क्षमता को काफी बढ़ावा मिलेगा.” डीएसी ने इसके अलावा 127 कैलीबर की बंदूकों को नौसेना के लिए खरीद करने को मंजूरी दी, जिसे नए युद्धपोतों में लगाया जाएगा. अमेरिका की बीएई सिस्टम्स से यह खरीद 3000 करोड़ रुपए से अधिक की लागत में की जाएगी.

एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल ‘नाग’ का सफल परीक्षण

बीते साल 8 सितंबर को रक्षा विकास अनुसंधान संगठन (डीआरडीओ) ने भारत में निर्मित तीसरी पीढ़ी की एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम) ‘नाग’ का राजस्थान में सफल परीक्षण किया था। उस दौरान मिसाइल ने सशस्त्र सेना की इच्छा के अनुसार अलग-अलग दूरी पर रखे गए अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदा.

दोनों मिसाइल के सफलतापूर्वक परीक्षण और इससे पहले जून (2017) में किए गए परीक्षण के बाद एटीजीएम ‘नाग’ के साथ एनएएमआईसी प्रक्षेपण प्रणाली पूरी तरह स्थापित हो गई थी। इस प्रकार नाग मिसाइल ने सभी विकास परीक्षण को सफलतापूर्वक पूरा किया था.

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